संभागीय आईटीआई के प्राचार्य सतीष मोरे ने संचालक के बिना आदेशनिकाले लाखों रूपये

संभागीय आईटीआई के प्राचार्य सतीष मोरे ने संचालक के बिना आदेश निकाले लाखों रूपये
एसपीटी न्यूज संतराम निषरेले प्रधान संपादक
नर्मदापुरम संभागीय आईटीआई में निरंतर फर्जीवाडे की परत खुलते जा रही है और निरंतर खबर प्रकाषन के बाद भी कलेक्टर कमिष्नर एवं संचालक कौषल विकास संचालनालय इस ओर ध्यान नही देे रहें है । इससे ऐसा प्रतीत होता है कि सब की मिली भगत है
यह है मामला-
संभागीय शा आईटीआई में विकास समिति है जहॉ पर बिना संचालक/जे.डी या आईएमसी अध्ययक्ष शिरुमाल नवलानी की बिना अनुमति से कोई राषि खर्च करने का प्रावधान नही है । यदि आकस्मिक व्यय या आकस्मिक खर्चे की बात आती है तो आईएमसी अध्ययक्ष सीरूमल के अध्ययक्ष से उचित और अनिवार्य राशि खर्च की जा सकती है वह भी संस्थान के प्रषिक्षणार्थीओं के हित में हो । लेकिन प्राचार्य सतीष मोरे जब से नर्मदापुरम आये है तब से सारे नियमों को ताख में रख कर खर्च किये जा रहें है यहॉ तक कि इन खर्चे की अनुमतियॉ जेडी या संचालक से नही ली है । जो कि एक लापरवाही के साथ-साथ आर्थिक अनिमित्ताओं की श्रेणी में आता है जो एक निदंनीय कार्य है ं ऐसे लापरवाह प्राचार्य के खिलाफ एफआईआर की जाये । ताकि शा. राषि का गबन को रोका जाये । एवं इनके नर्मदापुरम कार्यकाल में किये गये समस्त भुगतानों की सूक्ष्मता से जॉच की जाये
प्राचार्य ने गोलमोल नोटशीट तैयार कर निकाले लाखों रूपये ।
किसी ने सही कहॉ है कि चालाक लाख कोशिश सही करता है लेकिन एक गलती छोड देता है ऐसा ही प्राचार्य सतीष मोरे ने किया कि नोटशीट तो तैयार की लेकिन न तो उस पर नोटशीट क्रमांक है, न निकाले जाने वाली राशि का सही उल्लेख है, और यहा तक कि न अध्यक्ष की सील है, न प्राचार्य /सचिव के हस्ताक्षर न सील लगाई गई है । और यहॉ तक कि नोट शीट मे विषय में लिखा है कि आकस्मिक कार्य हेतु रूपये 25000/हजार का व्यय करने की अनुमति/सहमति प्रदान की जाये । और उसी नोटशीट के अंत में लिखा है प्रतिमाह 25000/व्यय करने की अनुमति। अब सोचने की और चिंता की बात यह है कि आखिर कौन सी राशि सही है । विषय में लिखी पंच्चीस हजार या अंत में लिखी पच्चीस हजार रू प्रतिमाह लिखी राशि सही है । और नोटशीट को देख कर लग रहा है कि यह नोटशीट फर्जी है । क्योंकि न तो क्रमांक है न जे.डी कौषल विकाय संचालनालय का कोई जिक्र है । न राशि शब्दों लिखी है । और यह सब समय-समय पर बदला जा सकें षायद इसलिये ऐसा किया है । क्योंकि राषि अंको और शब्दों लिखने के बाद उसें बदलना बहुत मुस्किल तो है ही कठिन भी है । लेकिन प्राचार्य सतीष मोरे ने जो नोटशीट तैयार की है या जिसने भी की है बहुत होषियारी और चालाकी से की है । ताकि कभी भी व्यय की जाने वाली राषि को बदला जा सकें और निकाल कर अपने जेब गर्म किया सकें ।
बिल की जगह लेटरपेड पर किया भुगतान
संभागीय आईटीआई में प्रषिक्षण के बाद व्यक्ति के जीवन में निखार आ जाता है ऐसा कहा और माना जाता रहा है । लेकिन आई टीआई में नौकरी करने वालों के दिल और दिमांग में इस तरह फर्जीवाडे के गुण आ जाते है यह संभागीय आई टी आई नर्मदापुरम में देखा जा रहा है जहॉ पैसों को लेकर कुछ भी किया जा सकता है ं या यू कहे कि यहॉ के कर्मचारी अधिकारी बुद्विहीन है जिन्हें अपने कर्तव्यों और पद की गरिमा का ध्यान नही है । और यदि ऐसा है तो वरिष्ट अधिकारियों का कर्तव्य है कि ऐसे लापरवाह कर्मचारियों को तत्काल सेवा समाप्त कर दी जाना चाहिए जिन्हें अपने कर्तव्य के प्रति ज्ञान न हो । जो बिल और लेटरपेड में अंतर न समझे ऐसे अधिकारी सायद पैसा देकर ही अपने पद पर आये होगे जो अब उन पैसों को बसूलने में लगे है ।
इनका कहना
जब हमने आईएमसी अध्यक्ष सीरूमल से चर्चा करना चाहा तो उनके स्वस्थ ठीक न होने के कारण चर्चा न हो सकी यह जानकारीविपिन नवलानी ने दी
सीरूमल
अध्यक्ष आईएमसी नर्मदापुरम
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