केंद्रीय मात्स्यिकी शिक्षा अनुसंधान संस्थान पवारखेड़ा, नर्मदापुरम द्वारा खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषक संगोष्ठी की गई
एसपीटी न्यूज़ नर्मदापुरम।( संतराम निश रेले संपादक) जून 2026 को केंद्रीय मात्स्यिकी शिक्षा अनुसंधान संस्थान पवारखेड़ा, नर्मदापुरम द्वारा खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषक संगोष्ठी कार्यक्रम ग्राम पंचायत उंद्राखेडी में आयोजित किया गया जिसमें लगभग 25 से 30 कृषकों ने अपनी भागीदारी दी। इस कार्यक्रम को संचालित हसन जावेद तकनीकि सहायक द्वारा किया गया। तथा कार्यक्रम की भूमिका की रूपरेखा पर डॉ. शशि भूषण सीनियर वैज्ञानिक प्रकाश डाला गया। तथा इस अवसर पर जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जोनल कृषि अनुसंधान केन्द्र पवारखेडा के डॉ. विनोद कुमार, कृषि वैज्ञनिक ने अपने व्याख्यान में बताया कि खेत बचाओ अभियान में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है। वैज्ञानिकों द्वारा केंद्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान, पवारखेड़ा, नर्मदापुरम द्वारा खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए जागरूक किया गया। इस कार्यक्रम में डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता, जैव विविधता तथा पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती मिट्टी की सेहत सुधारने, उत्पादन लागत कम करने तथा सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उत्पादन का प्रभावी माध्यम है। इस अवसर पर डॉ. हर्षा हरिदास, वैज्ञानिक भी उपसिथत रही।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, मल्चिंग तथा स्थानीय संसाधनों पर आधारित खेती की तकनीकों की जानकारी दी। डॉ. विनोद कुमार, कृषि वैज्ञानिक ने अपने व्याख्यान में बताया कि एकीकृत कृषि प्रणाली एवं मत्स्य पालन को प्राकृतिक खेती के साथ जोड़कर अतिरिक्त आय प्राप्त करने के उपाय बताए। डॉ. विनोद कुमार कृषि वैज्ञानिक ने मूंग की खेती की तकनीकि जानकारी एवं धान की आगामी खरीफ सीजन में धान की खेती के बारे में किसानों से मुख्य रूप से चर्चा की।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य मप्र के विभिन्न जिलों के किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित पोषक प्रबंधन तथा पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों के प्रति प्रेरित करना था। किसानों ने प्राकृतिक खेती को अपनाने में रुचि दिखाई तथा इसे टिकाऊ कृषि और भविष्य की आवश्यकता बताया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर आभार श्री रघुवीर मीना द्वारा दिया गया।
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