तैतीस लाख,सैंतालीस हज़ार रुपये का आख़िर क्या किया जेल अधीक्षक ने ???
तैतीस लाख,सैंतालीस हज़ार रुपये का आख़िर क्या किया जेल अधीक्षक ने ??? भाग दो

(एसपीटी न्यूज़ संतराम निशरेले प्रधान संपादक)
नर्मदापुरम केंद्रीय जिला जेल नर्मदापुरम खंड (अ) की लापरवाही की परतें खुलती जा रही है लापरवाही भी इस प्रकार की सामने आ रही है जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि यहाँ बैठे आला अधिकारी अपनी बुद्धि विवेक का यूज़ नहीं करते हैं कैदियों के समान इनकी बुद्धि भी क़ैद हो चुकी है हाल में ही सामने आया मामला वर्ष 2019 वर्ष 2023-24 तक शासन से प्राप्त राशि का दुरूपयोग जो सामने आया हुआ है 33,24 रुपये का है जो किसी विभाग की उन्नति में काम आ सकती थी लेकिन अब हठधर्मी और मूर्खता के चलते नाथू राशि का उपयोग किया न ही समय पर वापस लौटाया और यदि समय पे ऑडिट नहीं होता तो शायद यह राशि गोलमोल करके हड़पी भी जा सकती थी इस प्रकार की लापरवाही जेल में निरंतर सामने आ रही है आवश्यकता है यहाँ के प्रत्येक दस्तावेज़ के ऑपरेशन का जिससे की भ्रष्टाचार की सबकी पोल खोल सके
क्या है पूरा मामला जानिए:~
वर्ष के अन्त में समर्पण की जाने वाली राशि रुपये 71.66 लाख एवं वर्ष के अन्त में अवशेष राशियों का समय पर समर्पण न कर वर्ष के अंत में व्यपगत हुईं राशि रु. 33.47 लाख ।
म प्र शासन वित्त विभाग ज्ञापन क्रमांक 53/आर 213/चार/ब-1/2012 भोपाल दिनांक 13.2.2012 के अनुसार यथा संभव समस्त समर्पण उस वित्तीय वर्ष में 15 जनवरी के पूर्व कर लिया जाना चाहिए ताकि वित्त विभाग उपलब्ध संसाधनों का उपयोग अनयत्र कर सके।
मध्य प्रदेश बजट मैन्युअल भाग-1 के पैरा 1.8 के अनुसार आहरण और संवितरण अधिकारी (डीडीओ) समेकित निधि से धन निकालने और राज्य सरकार की ओर से भुगतान करने के लिए अधिकृत अधिकारी हैं। वे उन्हें सौंपे गए खाते के प्रमुखों के लिए राजस्व और व्यय का विस्तृत अनुमान तैयार करने के लिए भी जिम्मेदार हैं।
पैरा A.39 के अनुसार वर्ष के दौरान आहरण एवं संवितरण अधिकारी यह देख सकते हैं कि किसी विस्तृत शीर्ष, उपशीर्ष के अंतर्गत व्यय बजट में प्रावधानित राशि से कम होने की सम्भावना हैं, ऐसी बचतों की राशि सुनिश्चित करने के पश्चात् आहरण एवं संवितरण अधिकारी को बिना विलम्ब किये इसके सम्बन्ध में नियंत्रण अधिकारी को रिपोर्ट करना चाहिए । लेकिन जेल में बैठे आला अधिकारी अपनी ज़िम्मेदारियों से बहुत दूर नज़र आ रहे हैं या यूँ कहें किशासकीय राशी इनकी ख़ुद की राशि है इस प्रकार से उपयोग कर रहे हैं और ये दोनों ही बात निंदनीय है कि इसके ज़िम्मेदार अधिकारियों पर कठोर अनियमिताओं से जुड़ी कार्रवाई की जाना चाहिए और इन्हें तत्काल अपने पद से हटाकर किसी अन्य जगह भेजे जाएं
प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 15 जनवरी तक बचत/समर्पण योग्य राशि को वित्त विभाग को समर्पित कर दिया जाना चाहिए जिससे उस राशि का उपयोग अन्य योजनाओं में किया जा सके ।
ऐसे हुआ ख़ुलासा
लेखापरीक्षा में बजट सम्बन्धी ऑनलाइन एवं अभिलेखों की नमूना जाँच में पाया गया कि कार्यालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 तक की अवधि में राजस्व और व्यय का विस्तृत अनुमान तैयार नहीं किये गए । जिसके कारण महानिदेशक द्वारा अनुमान के आधार पर इस कार्यालय को राशियाँ जारी की गई । अनुमान के आधार पर राशि जारी करने के कारण वित्तीय वर्ष 2023-24 के अंत में विभिन्न उद्देश्य शीर्षों के अंतर्गत राशि रु 7166419/- उपयोग नहीं की गई और न ही निर्धारित समयसीमा में समर्पित की गई एवं विभिन्न उद्देश्य शीर्षों के अंतर्गत राशि रु 3347024/- उपयोग नहीं की गई और न ही निर्धारित समयसीमा में समर्पित की गई अतः राशि व्यपगत हुई । विवरण निम्नानुसार है :-
Sr. No.
Allotment Period
Budget Allotment
Surrender Amount
Accounted Expenditure
Remaining Budget (Laps)
1 2019-20
66428104
487512
64700112
0
2 2020-21
69594837
3333872
64526117
0
3 2021-22
72136456
1526761
65437911
2836195
4 2022-23
75595630
592602
74707120
295908
5 2023-24
91631603
1225672
90191010
214921
Total
375386630
7166419
359562270
3347024
उपरोक्त से स्पष्ट है कि बिना आवश्यकता के राशि का बजट में प्रावधान किया गया जो बजट नियंत्रण एवं पूर्वानुमान की कमी को प्रदर्शित करता है उक्त राशियों का किसी अन्य विभाग में पुनर्विनियोजन किया जा सकता था विभाग अधिकारियों की लापरवाही के चलते ऐसा नहीं किया जा सका।
आपत्ति इंगित करने पर विभाग ने अपने उत्तर में बताया कि विगत पांच वर्षों में वित्तीय वर्ष के अंतिम कार्य दिवसों में विभिन्न मदों पर आवंटित राशि व्यपगत किया गया है। व्यपगत के संबंध में जेलों को बजट का आवंटन विभिन्न शीर्ष मदों पर तिमाही प्रदाय की जाती है। अधिकांश व्यपगत राशि अंतिम तिमाही के अंतिम माह के कुछ
आवंटित होने तथा आवंटित बजट हेतु देयक प्रस्तुत करने पर शासन के दद्वारा प्रतिबंध लगाये जाने के कारण आवंटित राशि व्यपगत की गई है
तो वहीं जेल विभाग के अधिकारियों द्वारा दिये गये लीपापोती के संबंध में उत्तर को महालेखाकार ग्वालियर ने भी उत्तर मान्य नहीं किया है
क्योंकि व्यपगत राशि समय पर समर्पित की गई होती तो उक्त राशि का उपयोग वित्त विभाग द्वारा अनयत्र किया जा सकता था जिसका उपयोग नहीं किया जा सका।
कंडिका शासन/विभागाध्यक्ष के ध्यान में लाई गई है ताकिअन्य लापरवाही को ख़ुलासा किया जा सके और पकड़ा जा सके
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