महिला मंडल राजा मोहल्ला ने निकाली काबड़ यात्रा

अगस्त 2, 2025 - 12:44
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महिला मंडल राजा मोहल्ला ने निकाली काबड़ यात्रा

एसपीटी न्यूज़ संतराम निशरेले 

महिला मंडल राजा मोहल्ला ने निकाली काबड़ यात्रा

धार्मिक नगरी नर्मदापुरम में प्रति वर्षानुसार इस वर्ष भी श्रावण मास मे मातामढ़िया राजा मोहल्ला से कालेमहादेव तक महिला मंडल द्वारा काबड़ यात्रा निकाली गई। समिति की आशा चौकसे रीना चौकसे ने बताया की किशोर घाट से नर्मदाजल भरकर काबड़िये पंक्तिबद्ध होकर काले महादेव पहुचे वहां उन्होंने भोलेनाथ पर जल अर्पित कर सबकी समृद्दी एवं खुशहाली की कामना करते हुए पूजा अर्चना की तथा आरती कर भोग लगाकर प्रसाद वितरण किया। यात्रा मे नपा सभापति नयना सोनी, पूजा अर्पित मालवीय, बिंदिया मांझी, विजया कदम, आरती चौकसे, नेहा रावत, संगीता,अनिता,स्वाति, साधना अग्रवाल सहित सैकड़ो की संख्या मे श्रद्धालू शामिल हुए। वही  मंजू एवं भावना ने बताया पूज्य गुरुदेव धर्माचार्य सोमेश परसाई जी की प्रेरणा से माता मढ़िया मे महिला मंडल द्वारा भगवान भोलेनाथ का सम्पूर्ण मास प्रतिदिन रुद्राअभिषेक आचार्य ऋषि दुबे के द्वारा विधि विधान संपन्न कराया जा रहा है। अंत मे श्रद्धा दुबे द्वारा सभी का आभार माना।

क्या होती हैं कांवड़ यात्रा

कांवड़ यात्रा एक प्राचीन हिंदू तीर्थयात्रा है, जिसमें भक्त, जिन्हें कांवड़िए कहा जाता है, पवित्र गंगा जल भरकर उसे अपने कंधों पर रखकर लाते हैं और भगवान शिव के मंदिरों में शिवलिंग का अभिषेक करते हैंयह यात्रा मुख्य रूप से सावन के महीने में होती है और भगवान शिव के प्रति समर्पण का प्रतीक है। 
कांवड़ यात्रा का इतिहास:
  • पौराणिक कथाओं के अनुसार, कांवड़ यात्रा की शुरुआत भगवान शिव के भक्त रावण द्वारा की गई थी। 
  • समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने ग्रहण किया था, जिससे उनके गले में जलन होने लगी थी। 
  • रावण ने गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक किया, जिससे उनके गले की जलन कम हुई। 
  • इस घटना के बाद से, कांवड़ यात्रा की शुरुआत हुई, जिसमें भक्त गंगाजल भरकर भगवान शिव को अर्पित करते हैं। 
  • यह यात्रा सावन के महीने में विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। 

कांवड़ यात्रा का महत्व:
  • कांवड़ यात्रा भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। 
  • यह यात्रा शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति पाने का एक साधन मानी जाती है। 
  • मान्यता है कि कांवड़ यात्रा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। 
  • यह यात्रा भक्तों को अनुशासन, समर्पण और भक्ति की भावना सिखाती है। 
  • कांवड़ यात्रा में भक्त नंगे पैर चलते हैं, ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं, और "बोल बम" का जाप करते हैं। 

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SPT News प्रधान संपादक संतराम निषेरेले जिला अध्यक्ष पत्रकार कल्यांण महासंध नर्मदापुरम 9407268810